Friday, March 12, 2010

पाश्चात्य संस्कृति से बढ़े सामाजिक विकार : नवल किशोर

 बद्रीप्रसाद महर्षि स्मृति में व्याख्यानमाला में मुख्य वक्ता प्रो.सत्यप्रकाश शर्मा, कृपाशंकर शर्मा, प्रो. युगलकिशोर मिश्र तथा पं. नवलकिशोर शर्मा।
जयपुर. राजस्थान यूनिवर्सिटी के संस्कृत विभाग व पंडित बद्रीप्रसाद महर्षि चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से आयोजित पं. बद्रीप्रसाद महर्षि स्मृति व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। व्याख्यान का विषय 'वैदिक संस्कृति व वर्तमान चुनौतियां था। व्याख्यानमाला में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व गुजरात के पूर्व राज्यपाल पं. नवलकिशोर शर्मा ने कहा कि वैदिक संस्कृति आध्यात्म पर और पाश्चात्य संस्कृति भौतिकवाद पर टिकी है। पिछले कुछ दशकों से भारत में हावी पश्चिमी संस्कृति ने सामाजिक विकार बढ़ा दिए हैं, लिहाजा अपनी समृद्ध परंपरा व संस्कृति को बचाने के लिए बदलाव की जरूरत है, नहीं तो खाओ-पीओ मौज उड़ाओ संस्कृति परिवारों को बिखेर देगी। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. सत्यप्रकाश शर्मा ने कहा कि वैदिक संस्कृति विश्व में श्रेष्ठ रही है। ज्ञान विज्ञान व सभी धर्मों का स्रोत वेद रहे हैं। इसमें सब भाषा-भाषियों और धर्मों के समन्वय की बात कही गई है। वैदिक संस्कृति त्याग का भाव सिखाती है। इसके बावजूद आज परिवारों के विखंडन का खतरा मंडराने लगा है। राजस्थान संस्कृत यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. युगलकिशोर मिश्र ने कहा कि पाश्चात्य संस्कृति ने सत्य को दबाया गया, इसलिए ईसा मसीह को सूली पर चढऩा पड़ा। ट्रस्ट के कृपाशंकर शर्मा, अभिनेष महर्षि, संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. विनोद शास्त्री ने अतिथियों का स्वागत किया।

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