तीन मंचों पर होंगे विविध आयोजन
महारानी कॉलेज में मुख्य सभागार के साथ सेमिनार हॉल एवं खुले मंच पर भी कार्यक्रम होंगे। सेमिनार हॉल में जयपुर की लोक कला एवं संस्कृति पर प्रश्नोत्तरी, 'लोक परम्पराएं' पर लोक संवाद तथा 'हम भारत के लोग-हमारी भाषा, हमारी पहचान' विषय पर गोष्ठी आयोजित होगी। खुले मंच पर संस्कृत संभाषण, जादू, लोक रंग, लोक कथा, लोक कविता, लोक स्मृतियां, 'हम भारत के लोग : संविधान और लोक संस्कृति का समन्वय'
जैसे विषयों पर कार्यक्रम होंगे। इतिहास संकलन समिति की ओर से इतिहास लेखन की लोक परंपरा एवं वंशावली का भी प्रस्तुतीकरण किया जाएगा। परिसर के विभिन्न उद्यानों में लोक कला, लोक विज्ञान, भारतीय संविधान, गुरुकुल एवं भारतीय शिक्षा परंपरा, राजस्थान की वीर-वीरांगनाओं तथा औषधीय पौधों से संबंधित प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी। साथ ही साहित्य केंद्र और लोक संस्कृति से जुड़े अन्य स्टॉल भी रहेंगे। खेल मैदान में कबड्डी, रस्साकशी, तीरंदाजी सहित पारंपरिक खेलों की गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
महारानी कॉलेज में लोक संस्कृति के विविध रंग
महारानी कॉलेज परिसर में यात्रा का पारंपरिक वेशभूषा एवं भारतीय रीति-रिवाजों के साथ स्वागत किया जाएगा। विद्यालय की बालिकाओं द्वारा तिलक, कच्छी घोड़ी नृत्य, शहनाई वादन तथा ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत किया जाएगा। मुख्य सभागार में वैदिक मंगलाचरण, लोक नृत्य, मांड़ गायन, भवई, चरी एवं कालबेलिया नृत्य, कच्छी घोड़ी और कठपुतली नृत्य, लोकगीत, लोक साहित्य एवं लोक संस्कृति पर व्याख्यान सहित अनेक कार्यक्रम होंगे। यात्रा में लोकदेवताओं एवं लोकनायकों की झांकियां भी विशेष आकर्षण रहेंगी। बाबा रामदेव जी, वीर तेजाजी तथा संत रविदास जी से जुड़ी सांस्कृतिक एवं प्रदर्शनी झांकियों के माध्यम से लोक आस्था, सामाजिक समरसता और लोक चेतना के विभिन्न पक्षों को सामने रखा जाएगा। परिसर में राजस्थान की लोक परंपराओं और वीर-वीरांगनाओं से संबंधित प्रदर्शनियां भी लगाई जाएंगी।

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