Wednesday, December 05, 2012

सरकार ने लांघी आरक्षण की परिसीमा, सामान्य जातियों पर कुठाराघात

जयपुर . राजस्थान ब्राह्मण महासभा सहित कई संगठनों ने आरक्षण की परिसीमा को 50 से लांघकर 54 प्रतिशत करना सामान्य जातियों के हितों पर कुठाराघात बताया है। महासभा ने ब्राह्मणों को 14 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो सवर्ण आंदोलन करेंगे। महासभा के कार्यकारी अध्यक्ष एसडी शर्मा ने मंगलवार को मीडिया को बताया कि सरकार ने इसरानी आयोग की रिपोर्ट के दृष्टिगत 5 प्रतिशत आरक्षण विशिष्ट पिछड़ी जाति मानकर गुर्जरों को देने का निर्णय किया है। हालांकि इसरानी आयोग ने अपनी रिपोर्ट में हाईकोर्ट के निर्देशानुसार 50 प्रतिशत आरक्षण की परिसीमा में ही देने की अनुशंसा की है। मगर सरकार ने 50 प्रतिशत की परिसीमा को लांघकर सवर्णों के हितों पर कुठाराघात किया है। इससे सामान्य जाति में चार प्रतिशत अवसर कम हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि 1952 की तुलना में सवर्ण जातियों को सरकारी नौकरी में 60 प्रतिशत अवसर कम हो गए हैं। उन्होंने कहा कि सवर्णों को आरक्षण देने के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2004-05 में आयोग का गठन किया गया था, जिसने सवर्णों को आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की सिफारिश की थी।  बाद में इसे केंद्र सरकार को 9वीं अनुसूची में शामिल करने के लिए भेजा जा चुका है। अब आरक्षण के लिए नया आयोग गठन करने की जरूरत ही कहां है। 
राजस्थान वैश्य आरक्षण मंच के अध्यक्ष अरुण अग्रवाल ने बताया कि सवर्णों में आज भी कई लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। हम पटरियों पर बैठने वाले नहीं है और ना ही सड़कों पर आरक्षण करने वाले हैं। मगर यदि हमारे अधिकारों पर कुठाराघात होता है, तो हमें मजबूरन ऐसे कदम उठाने पड़ेंगे। राजस्थान कायस्थ महासभा के प्रदेश अध्यक्ष कुमार संभव ने कहा कि सवर्णों का अधिकार ना छीनें। लाठी और वोट की राजनीति इस सरकार को भारी पड़ेगी। पांच प्रतिशत आरक्षण हमसे छीना जा रहा है। पदोन्नति में आरक्षण को भी गोल मोल कर पेश किया गया। आरक्षण खत्म होना ही चाहिए। अखिल भारतीय समानता मंच, राजपूत समाज सहित अन्य संगठनों ने भी आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को 14 प्रतिशत आरक्षण देने की अपील की।

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