Saturday, February 26, 2011

विषयों से निवृत्ति होने पर ही परमात्म साक्षात्कार : अरविंद जी









जयपुर . प्रताप नगर के देहलावास हनुमान मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन अरविंद महाराज ने प्रवचन में कहा कि हमारे जीवन में से अगर शब्द, स्पर्श, रूप, रस, गंध रूपी पांच विषयों की निवृत्ति हो जाए तो फिर परमात्म साक्षात्कार में देरी नहीं होगी। आज गज ग्राह प्रसंग एवं समुद्र मंथन प्रसंग में विषय भोगों में रत मानव के लिए बताया कि जब इस संसार सागर का हम मंथन करते हैं तो इसमें से पंच विषय रूप विष निकलता है, लेकिन जिस मनुष्य ने राम नाम का अमृत पी लिया हो उस पर ये विषय कोई प्रभाव नहीं डाल पाते हैं, क्योंकि वह नीलकंठ महादेव की भांति इस विष को कंठ से नीचे नहीं जाने देता।
आज की कथा में भगवान श्री राम का जन्मोत्सव अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। संक्षिप्त राम कथा में हनुमानजी की सियाराममय दृष्टि को भी प्रदर्शित किया गया। किस प्रकार माता सीता द्वारा दी गई माला के मोतियों में सीताराम की छवि न दिखने पर हनुमानजी ने मोतियों को तोड़ डाला और फिर अपनी छाती फाड़कर अपने हृदय में सीताराम के सभी को दर्शन कराए। सबरी प्रसंग के समय सभी श्रोता ऐसे विभोर हो उठे कि अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए। इसके अतिरिक्त मत्स्य अवतार, विश्व मोहिनी लीला, वामन अवतार, परशुराम अवतार, सत्यवादी हरिश्चंद्र का जीवन चरित्र, गंगा अवतरण, दिलीप प्रसंग आदि का भी विशद विवेचन किया गया।

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