Friday, December 17, 2010

वास्तु दोष से गृह स्वामी को परेशानियां

  • बाबूलाल शास्त्री, टोंक                                                                                                      
ज्योतिष एवं परामर्श शिविर में वास्तु शोध संस्थान के निदेशक बाबूलाल शास्त्री ने कहा कि वास्तु शास्त्र एक प्राचीन वैज्ञानिक जीवन शैली है। वास्तु विज्ञान सम्मत तो है, ही साथ ही वास्तु का संबंध ग्रह नक्षत्रों एवं धर्म से होता है। वास्तु दोष होने पर गृह स्वामी, परिवार के लोगों को रोग, आर्थिक व मानसिक परेशानियां का सामना करना पड़ता है। भवन के दक्षिण पश्चिम भाग नेऋत्य कोण का संबंध पृथ्वी तत्व से होता है अत: इसे ज्ïयादा खुला रखना अशुभ होता है। क्योंकि अन्य स्थानों की तुलना में हल्का होने से उसके अनेक प्रकार की शारीरिक व मानसिक व्याधियों का शिकार होना पड़ता है। परिवार में तनाव निराशा एवं क्रोध पैदा होता है। भवन का ईशान कोण कटा हुआ नहीं होना चाहिए। वरना रहने वालो को रक्त विकार से ग्रसित होना पड़ता है। ईशान कोण में यदि उत्तर भाग ऊंचा हो तो उस परिवार की स्त्रियों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। भवन के पूर्वी दक्षिण भाग अग्निकोण का संबंध अग्नि तत्व से है। इस स्थान पर रसोई निर्माण कर पकवान बनाना शुभ है।

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